UP Farmer Producer Organizations 2022: UPFPO

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आज यह धारणा प्रबल होती जा रही है कि खेती घाटे का सौदा है। अब प्रश्न उठता है कि बाजार में तो खाने पीने की चीजें जो दुकान से बिकती हैं काफी महंगी होती हैं और बनती तो किसान द्वारा किये गये उत्पादन से ही है। तो फिर किसान को अपने उत्पादन का लाभ क्यों नहीं मिलता है? इसका उत्तर है कि हमारे किसान भाई उत्पादक तो हैं लेकिन वह जागरूक होकर अभी उद्यमी या व्यवसायी नहीं बने हैं। खेती-बाडी में केवल अच्छा उत्पादन एवं उत्पादकता प्राप्त कर लेना किसान की आर्थिक समृद्वि की गारंटी नहीं है। किसानो को अपने उत्पाद का वाजिब मूल्य प्राप्त करने के लिए उत्पादन के बाद समुचित भण्डारण, मूल्य संवर्द्वन के लिए सफाई, छनाई, श्रेणी करण, प्रसंस्करण जैसे Fresh, Frozening, Drying, Powdering, Canning, Labelling और विपणन व्यवस्था पर ध्यान देना होगा। इसलिए किसानों के संगठित होने की आवश्यकता है। 

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7 UPFPO का गठन एवं पंजीकरण:

UTTAR PRADESH Farmer Producer Organizations: UPFPO

उत्तर प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है। प्रदेश की दो तिहाई आबादी की आजीविका पूरी तरह से कृषि एवं सहाय्यित क्षेत्र पर निर्भर है। कृषि जोतों के आधार पर प्रदेश में 2.38 करोड़ कृषक परिवार हैं। इनमें से लगभग 79 प्रतिशत सीमान्त किसान परिवार तथा 13 प्रतिशत लघु सीमान्त कृषक परिवार सम्मिलित हैं। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को ‘‘एक ट्रिलियन डालर अर्थव्यवस्था‘‘ के रूप में स्थापित करने में ‘‘उत्तर प्रदेश कृषक उत्पादक संगठन नीति-2020‘‘ एक सशक्त साधन के रूप में स्थापित की गयी। इस नीति की मूल अवधारणा प्रदेश के किसान को कृषक उद्यमी के रूप में संगठित कर ‘‘खेती-बाड़ी‘‘ की सनातन भारतीय परम्पराओं को पुनः स्थापित करते हुये प्रदेश के प्रत्येक कृषक परिवार को पूर्ण आत्मनिर्भर बनाना है।

किसान को खेती बाड़ी में आने वाली प्रमुख समस्यायें निम्न हैंः

  1. किसानो के पास-छोटी-छोटी जाते हैं आने वाले समय में पीढी दर पीढी ये जोते और छोटी होती जायेंगी। छोटी जोत के कारण खेती बाडी के लिए सभी व्यवस्थाये करने में कठिनाई आती हैं।
  2. किसान के पास सीमित आर्थिक संसाधन या पूंजी की कमी के कारण सभी निवेशो की समय पर व्यवस्था करना कठिन होता है।
  3. किसान तक सूचना एवं तकनीकी का न पहुॅच पाना।
  4. स्थानीय स्तर पर भण्डारण, मूल्य संवर्द्वन एवं प्रसंस्करण की सुविधा का अभाव।
  5. उत्पादन बेंचने के लिए बिचौलियों पर निर्भरता एवं बाजार की कमी।

अब प्रश्न उठता है कि इन किसानों को कैसे संगठित करके उनकी इन समस्याओं का निदान किया जाये। इसी कड़ी में एक प्रयास है ’’फार्मर्स प्रोड्यूसर आर्गनाइजेशन :FPO’’। आपने बड़ी-बड़ी कम्पनियों का नाम सुना होगा। ये सारी कम्पनियां भारत सरकार द्वारा बनाये गये कम्पनी अधिनियम 1956 के अर्न्तगत संचालित होती हैं और भारत सरकार के रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनी द्वारा नियंत्रित होती हैं। इस कम्पनी अधिनियम के अर्न्तगत सरकार द्वारा अपने किसानों को भी अपनी स्वयं की कम्पनी बनाकर व्यवसाय करने का अवसर प्रदान किया गया है। अगर सीधे शब्दों में कहे तो अब किसान हमारा उत्पादक ही नहीं अपितु वह किसान तथा बनिया के रूप में काम कर सकता है। इस प्रकार ’’कृषक उत्पादक कम्पनी कम्पनी अधिनियम, 1956’’ के अर्न्तगत् एक पंजीकृत संस्था है। जिसके निश्चित उद्देश्य और गतिविधियां होती हैं। अब सबसे बड़ी बात कि हमारे किसान भाई कैसे अपनी फार्मर्स प्रोड्यूसर कम्पनी बना सकते हैं। इसके लिए उन्हें एक चरणबद्व प्रक्रिया अपनानी होती है।

सबसे पहले उनको छोटे-छोटे फार्मर्स प्रोड्यूसर ग्रुप या उत्पादक समूह बनाने की जरूरत होती है। उत्पादक समूह एक ऐसे किसानों का समूह है जो एक समान उत्पादन कर रहे हैं। जैसे कई कृषक अनाज, दलहन, तिलहन, सब्जी, फल-फूल, मुर्गी पालन आदि कार्य में संलग्न है। एक ही गतिविधियों से जुडे हुए कृषक जो कार्य कर रहे हैं उनका उत्पादक समूह बनाया जा सकता है। समूह के सारे सदस्य मिलकर के कृषि निवेश व्यवस्था, उत्पादन, भण्डारण और उत्पाद बेचने का कार्य करेंगे और इन समूहों के गठन और संचालन के लिए कुछ सामान्य से नियम बना लेने चाहिए जैसे-उनकी नियमित बैठक करना, बैठकों की कार्यवाही को लिखना, समूह की बातचीत इकट्ठा करना और उसका ब्योरा रखना और उसके बैंक में जमा करना। इस तरह से उत्पादक समूह अपनी गतिविधयां संचालित करेंगे।

इस प्रकार 10-15 कृषक परिवारो को लेकर एक कृषक उत्पादक समहू बनाया जा सकता है और इस प्रकार के चार-पॉच या इससे अधिक समूह एक गॉव में बनाये जा सकते है। इस प्रकार से 15-20 ग्रामों में ऐसे समूह बनाकर और लगभग 1000 किसानों को इकट्ठा किया जा सकता है और इन 1000 किसानों की संख्या होने के बाद एफ0पी0ओ0 के गठन की ओर आसानी से कदम बढाया जा सकता है। यह आवश्यक नहीं है कि संख्या 1000 ही हो यह 500, 600 या 800 भी हो सकती है। लेकिन जितनी ज्यादा संख्या हो उतना ही अच्छा रहता है। सभी उत्पादक समूहो की एक बैठक करके प्रत्येक सदस्य की शेयर होल्डर बनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। अर्थात् अंश धारक बनाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। उसको कुछ धनराशि एफ0पी0ओ0 के गठन के लिए अंष के रूप में जमा करनी होती है। इस प्रकार से 5 लाख रू0 की धनराशि जमा करना एफ0पी0ओ0 के पंजीकरण के लिए आवश्यक है। इसके पश्चात् एफ0पी0ओ0 के गठन के लिए न्यूनतम 10 या अधिक किसान इकट्ठा करके कृषकों की कम्पनी को बनाया जा सकता है।

UP Farmer Producer Organizations (FPOs) महत्वपूर्ण बिंदु / Overview

 

योजना का नाम Uttar Pradesh Farmer Producer Organizations 
आरम्भ की गई उत्तर प्रदेश द्वारा इस योजना का आरंभ किया गया ।
आरम्भ की तिथि 2021
लाभार्थी उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एफपीओ के लिए लघु एवं सीमांत किसान तथा भूमिहीन किसान को भी इसके लिए लाभार्थी होंगे।
उद्देश्य
  1. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को बढ़ावा देने के लिए एफपीओ का गठन किया जाएगा ताकि किसानों को लाभ मिल सके।
  2. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक एपीओ को अपनी स्थापना से लेकर 5 वर्ष तक व्यापक रूप से सरकार द्वारा समर्थन प्रदान किया जाएगा।
योजना का प्रकार उत्तर प्रदेश राज्य सरकार की योजना
Official website http://www.upfposhakti.com/up/ 

UPFPO के गठन के लिए दस्तावेज:

    • 10 चयनित सदस्य जिनमें 5 बोर्ड ऑफ डायरेक्टर सम्मिलित है।
    • न्यूनतम गारंटीशुदा एक लाख रूपये।
    • पंजीकृत की जाने वाली कम्पनी के कार्यालय का भारत में पता।
    • कम्पनी के नामित निदेशक मण्डल के सदस्यों PAN एवं Aadhaar Card की प्रति।
    • पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ।
    • निदेशक मण्डल के सदस्यों की बैंक पासबुक की फोटो प्रतियॉं।
    • कृषि जन्य आय का तहसीलदार/एस0डी0एम0 या जिला कृषि अधिकारी/उप कृषि निदेशक से प्रमाण पत्र।
    • कम्पनी के प्रस्तावित कार्यालय का पता सम्बन्धी साक्ष्य (बिजली/टेलीफोन बिल/रजिस्ट्री/किराया एग्रीमेन्ट की प्रति आदि) की प्रतियॉ।
    • निदेशक मण्डल के सदस्यों का पूर्ण विवरण।
    • (नाम, पता, आयु, शैक्षिक योग्यता आदि तथा उनका न्यूनतम 25 सेकेण्ड का वीडियो।
    • निवेशकों/अन्य सदस्यों का विवरण।
    • कम्पनी का प्रस्तावित नाम (न्यूनतम 03 नाम प्रस्तावित करने होंगे।

UPFPO के Online Registration के लिए दस्तावेज:

    • आधार नंबर 
    • बैंक अकाउंट नंबर
    • पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ
    • मोबाइल नंबर
    • Email id
    • FPO का नाम
    • FPO के कार्यालय का पता
    • FPO का पंजीकरण संख्या
    • FPO का पंजीकरण की तिथि
    • FPO का पंजीकरण का प्रमाणपत्र

UPFPO से लाभ:

एफ0पी0ओ0 से किसान भाईयों को मिलने वाले लाभ निम्न हो सकते है।

    1. बीज, खाद, कीटनाशक जैसे कृषि निवेशक के लिए एफ0पी0ओ0 कृषि विभाग से लाइसेन्स प्राप्त कर, इनका व्यवसाय कर सकते है। इससे किसान भाई स्वयं गुणवत्तायुक्त, किसी निवेशक उचित मूल्य और सही समय पर व्यवस्था कर सकते है।
    2. एफ0पी0ओ0 को कम्पनियॉं थाके विक्रेता (होल सेलर) भी बनाती है। इन कंपनियों की फ्रेचाइजी लेकर एफ0पी0ओ0 व्यवसाय कर सकते है।
  • विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत एफ0पी0ओ0 को निम्न सुविधायें दी जाती है।

जैसे

  • नेशनल फूड सिक्योरिटी मिशन, नेशनल मिशन फार सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, परम्परागत कृषि विकास योजना आदि के अन्तर्गत कलस्टर आधार पर आयोजित होने वाले प्रदर्शनों का लाभ एफ0पी0ओ0 पा सकते है।
  • फार्म मशीनरी बैंक/कस्टम हायरिंग सेन्टर के अन्तर्गत 40-80% तक की छूट पाकर एफ0पी0ओ0 अपने क्षेत्र में कृषि यंत्रीकरण द्वारा कृषको को सेवायें देकर लाभ कमा सकते है।
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खाद्यान्न खरीद केन्द्र के रूप में एफ0पी0ओ0 को मान्यता मिल सकती है। एफ0पी0ओ0 इसमें कमीशन पाकर स्वयं लाभान्वित होते है और कृषको को भी सुविधा रहती है।
  • बीजोत्पादन, बीज विधायन, गोदाम निर्माण की योजनान्तर्गत एफ0पी0ओ0 को 60 लाख रू0 तक का अनुदान मिलता है।
  • नेशनल फूड सिक्योरिटी मिशन/वी0जी0आर0ई0आई0 जैसे योजनाओं के अन्तर्गत मिनी राइसनमिल, दाल मिल, आटा मिल, तेल मिल की स्थापना हेतु मशीनों पर छूट पाकर स्थानीय स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण/मूल्य सम्वर्द्धन का कार्य एफ0पी0ओ0 कर सकते है।
  • एफ0पी0ओ0 के पास पंजीकरण प्रमाण पत्र उपलब्ध होने की दषा में मण्डी शुल्क में छूट का प्राविधान है।
  • भारत सरकार द्वारा लागू नये नियमों के अन्तर्गत अब एफ0पी0आ0े सीधे अपना माल उपभोक्ता को बेच सकते है। एफ0पी0ओ0 द्वारा ज्यादा मात्रा में किसी भी कृषि उत्पाद का उत्पादन कर सीधे बड़े-बड़े होटलों, माल्स और बाजार में बेचकर बिचोलियों से बचा जा सकता है।
  • सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं तथा बड़ी-बड़ी कम्पनियो द्वारा सी0एस0आर0 के अन्तर्गत चलाये जाने वाली प्रशिक्षण कार्यक्रमों प्रदर्शनों का लाभ कृषको को एफ0पी0ओ0 के माध्यम से आसानी से प्राप्त हो जाता है।

UPFPO का उद्देश्य:

उत्तर प्रदेश एफपीओ शक्ति पोर्टल को आरम्भ किया है। सरकार द्वारा इस पोर्टल को आरम्भ करने के लिए मुख्य उद्देश्य हैं कि राज्य के किसानों के लिऐ मंडियों और बाजार का विस्तार करना और बिचौलीयो पर किसानों की निर्भरता को खत्म करना जिससे किसान अपना प्रोडक्ट का सही मूल्य मिला सके तथा इस UPFPO SHAKTI पोर्टल की सहायता से किसानो का पंजीकरण आसानी से हो सके और किसान पोर्टल के माध्यम से मंडियों की सभी जानकारी मिल सकें। और UPFPO के माध्यम से  अन्य लाभ जैसे –

  • नेशनल फूड सिक्योरिटी मिशन, नेशनल मिशन फार सस्टेनेबल एग्रीकल्चर, परम्परागत कृषि विकास योजना आदि के अन्तर्गत कलस्टर आधार पर आयोजित होने वाले प्रदर्शनों का लाभ एफ0पी0ओ0 पा सकते है।
  • फार्म मशीनरी बैंक/कस्टम हायरिंग सेन्टर के अन्तर्गत 40-80% तक की छूट पाकर एफ0पी0ओ0 अपने क्षेत्र में कृषि यंत्रीकरण द्वारा कृषको को सेवायें देकर लाभ कमा सकते है।
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खाद्यान्न खरीद केन्द्र के रूप में एफ0पी0ओ0 को मान्यता मिल सकती है। एफ0पी0ओ0 इसमें कमीशन पाकर स्वयं लाभान्वित होते है और कृषको को भी सुविधा रहती है।
  • बीजोत्पादन, बीज विधायन, गोदाम निर्माण की योजनान्तर्गत एफ0पी0ओ0 को 60 लाख रू0 तक का अनुदान मिलता है।
  • नेशनल फूड सिक्योरिटी मिशन/वी0जी0आर0ई0आई0 जैसे योजनाओं के अन्तर्गत मिनी राइसनमिल, दाल मिल, आटा मिल, तेल मिल की स्थापना हेतु मशीनों पर छूट पाकर स्थानीय स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण/मूल्य सम्वर्द्धन का कार्य एफ0पी0ओ0 कर सकते है।
  • एफ0पी0ओ0 के पास पंजीकरण प्रमाण पत्र उपलब्ध होने की दषा में मण्डी शुल्क में छूट का प्राविधान है।
  • भारत सरकार द्वारा लागू नये नियमों के अन्तर्गत अब एफ0पी0आ0े सीधे अपना माल उपभोक्ता को बेच सकते है। एफ0पी0ओ0 द्वारा ज्यादा मात्रा में किसी भी कृषि उत्पाद का उत्पादन कर सीधे बड़े-बड़े होटलों, माल्स और बाजार में बेचकर बिचोलियों से बचा जा सकता है।
  • सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं तथा बड़ी-बड़ी कम्पनियो द्वारा सी0एस0आर0 के अन्तर्गत चलाये जाने वाली प्रशिक्षण कार्यक्रमों प्रदर्शनों का लाभ कृषको को एफ0पी0ओ0 के माध्यम से आसानी से प्राप्त हो जाता है।

UPFPO का गठन एवं पंजीकरण:

फार्मर्स प्रोड्यूसर कम्पनी बनाने की चरणबद्ध प्रक्रिया को बिन्दुवार निम्नवत् समझा जा सकता है।

  1. फार्मर्स प्रोड्यूसर कम्पनी के गठन एवं पंजीकरण के प्राविधान कम्पनी अधिनियम 1956 की धारा 581 सी में वर्णित है।  
  2. उत्पादक कम्पनी का पंजीकरण कराया जा सकता है।
  • 10 या अधिक व्यक्तियों द्वारा मिलकर जो उत्पादक हो या
  • कोई दो या अधिक उत्पादक संस्थान या
  • 10 या अधिक व्यक्तियों और उत्पादक संस्थानों द्वारा मिलकर

कृषक उत्पादक संगठन पंजीयन अधिनियम, पंजीयन की प्रक्रिया:

कृषक उत्पादक संगठन, कम्पनी अधिनियम 1956 (यथा संशोधित 2013) की धारा 465 (1) के भाग 581 अथवा उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी समिति पंजीयन अधिनियम 1965 (यथा संशोधित) के अधीन पंजीकृत व्यावसायिक निकाय है। इसमें कृषक/प्राथमिक उत्पादक अथवा उनके समूह संगठित हो कृषि एवं कृषि सहायतित (Agriculture & Agriculture Allied) क्षेत्रों में वित्तीय निवेश तथा अद्यतन तकनीकी का प्रयोग कर सम्पूर्ण मूल्य श्रृंखला की स्थापना का मार्ग सुगम तरीके से स्थापित कर स्थायी आर्थिक समृद्धि तथा सत्त विकास की परिकल्पना को मूर्त रूप प्रदान करने हेतु प्रयास करते हैं।

UPFPO के गठन पंजीयन की प्रक्रिया:

जैसा कि आपको पहले ही बताया गया है कि, UPFPO का पंजीयन कम्पनी अधिनियम 1956 (यथा संशोधित 2001) अथवा उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी समिति पंजीयन अधिनियम 1965 (यथा संशोधित) में किये जाने की व्यवस्था प्रचलित है। “VOCAL FOR LOCAL” ,AUR “LOCAL TO GLOBAL” परिकल्पना को मूर्त रूप प्रदान करने हेतु कम्पनी अधिनियम 1956 (यथा संशोधित 2013) को प्राथमिकता के साथ लागू करने की आवश्यकता है क्योंकि इस अधिनियम के अन्तर्गत पंजीकृत कम्पनियों की अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यावसायिक मान्यता है। साथ ही कृषि तथा कृषि सहायतित क्षेत्र के समस्त उत्पादों की सकल मूल्य श्रृंखला स्थापना करने की पूरी स्वतंत्रता है। 

जहॉं तक उत्तर प्रदेश राज्य सहकारिता पंजीयन अधिनियम 1965 (यथा संशोधित) में एफ0पी0ओ0 के पंजीयन का प्रश्न है।

इसमें कार्य विशेष के लिये ही पंजीयन की व्यवस्था है जैसे-मत्स्य पालन सहकारी समिति, कुक्कुट पालन सहकारी समिति, औद्योगिक सहकारी समिति इत्यादि। साथ ही इस प्रकार की समितियों के पंजीयन का प्रमाण-पत्र निर्गत करने का अधिकार सम्बन्धित विभाग के विभागाध्यक्ष को प्रदत्त है। उक्त के कम्पनी अधिनियम 1956 (यथा संशोधित 2013) के अन्तर्गत ही पंजीयन की प्रक्रिया तथा उसमें होने वाले व्यय का विवरण प्रस्तुत किया गया है।

UPFPO पंजीयन की प्रक्रियाः

कृषक उत्पादक संगठन का पंजीयन, कम्पनी अधिनियम 1956 (यथा संशोधित 2013) में करने हेतु, न्यूनतम 10 किसानों द्वारा एफ0पी0ओ0 के गठन की कार्यवाही प्रारम्भ की जा सकता है। 

इस सम्बन्ध में निम्नलिखित प्रपत्र या दस्तावेज की आवश्यक होती हैं:

  • समस्त 10 किसानों के पैन कार्ड।
  • समस्त 10 किसानों के आधार कार्ड।
  • समस्त 10 किसानों के बैंक पासबुक की इन्ट्री सहित।
  • समस्त 10 किसानों की दो-दो पासपोर्ट साइज फोटो।
  • समस्त 10 किसानों के खेत की खतौनी तथा कृषि विभाग द्वारा जारी कृषक प्रमाण-पत्र (उचित प्रारूप में कृषि विभाग से)।
  • समस्त 10 किसानों का मोबाइल फोन नम्बर तथा ई-मेल आईडी।

उक्त समस्त विवरण के अलावा निम्नलिखित अन्य सूचनायें भी अति आवश्यक हैः

  • फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी के दो प्रस्तावित नाम।
  • कुछ अतिरिक्त उद्देश्य (यदि आवश्यक हो)।
  • प्रस्तावित पंजीकृत कार्यालय का जमा विद्युत बिल की प्रति।
  • निदेशक तथा अंश धारकों की संख्या।

कम्पनी अधिनियम 1956 (यथा संशोधित 2013) में फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी (FPC) के पंजीयन के समय न्यूनतम 05 निदेशक तथा 05 शेयर होल्डर सदस्य होते हैं। भविष्य में यथा आवश्यकता अधिकतम 15 निदेशक हो सकते हैं कृषक उत्पादक संगठन में सुचारू व्यावसायिक प्रबन्धन हेतु अधिकतम 1000 शेयर होल्डर की सीमा निर्धारित किया जाना उचित होगा। कम्पनी अधिनियम 1956 (यथा संशोधित 2013) में पंजीयन की समस्त कार्यवाही प्रशिक्षित चार्टड एकाउण्टेंट अथवा कम्पनी सेक्रेटरी द्वारा पूर्ण की जाती है। इस हेतु समस्त 05 निदेशकों तथा 05 शेयर होल्डर सदस्यों के डिजीटल हस्ताक्षर भी बनवाना पड़ता है। पंजीयन की समस्त कार्यवाही ऑन-लाइन पूर्ण की जाती है।

पंजीयन शुल्क तथा उसके भुगतान की प्रक्रिया:

कम्पनी अधिनियम 1956 (यथा संशोधित 2013) में एफ0पी0ओ0 के पंजीयन तथा उसे पूर्ण क्रियाशील बनाये रखने हेतु 

  • कुल न्यूनतम व्यय का विवरण निम्नवत् हैः-

प्रथम वर्ष में जमा किये जाने वाले फार्म:

UPFPO  के को कम्पनी के रूप में पंजीयन तथा उसकी निरन्तरता बनाये रखने हेतु एफ0पी0ओ0 के पंजीयन हेतु कम्पनी की अधिकृत पूंजी की घोषणा के पंजीयन के समय निदेशक को करनी पड़ती है। रजिस्ट्रार आफ कम्पनीज भारत सरकार द्वारा रू0 1.0 लाख से रू0 10.00 लाख तक अधिकतम अधिकृत पूॅजी के सापेक्ष एक समान पंजीयन शुल्क आन लाइन जमा किया जाता है।

  • पंजीयन हेतु निम्नलिखित मदों में व्यय प्रस्तावित हैः

  1. समस्त 05 निदेशकों तथा 05 शेयर होल्डर के डिजीटल हस्ताक्षर पर व्यय।
  2. कम्पनी के नाम की स्वीकृति हेतु व्यय।
  3. कम्पनी का पंजीयन शुल्क के सापेक्ष व्यय तथा चार्टड एकाउण्टेंट/कम्पनी सेक्रटरी की प्रोफेशनल फीस जिसमें (कम्पनी का संविधान तैयार करना, पंजीयन के उपरांत उसकी 10 प्रतियां छपवाकर कम्पनी के निदेशक को उपलब्ध कराना सम्मिलित है।
  4. फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी के पंजीयन के उपरांत उसकी विधिक निरन्तरता बनाये रखने हेतु अलग-अलग फार्म जमाकरने होते हैं जिसके साथ आवश्यक शुल्क भी जमा करना होता है।
  5.  इसमें निम्नलिखित फार्म सम्मिलित हैंः
  1. प्रथम 30 दिन के अन्दर आडिटर नियुक्ति हेतु फार्म ADT-01 रजिस्ट्रार आफ कम्पनीज भारत सरकार को ऑन-लाइन जमा करने पर व्यय।
  2. फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी के पंजीयन के 180 दिन के अन्दर व्यवसाय प्रारम्भ करने की सूचना रजिस्ट्रार आफ कम्पनीज के कार्यालय में फार्म नं0 INC-20A जमा करने पर व्यय।
  3. फार्मर प्राोड्यूसर कम्पनी के पंजीयन के 180 दिन के अन्दर सी0इ0ओ0 की तैनाती की सूचना रजिस्ट्रार आफ कम्पनी के कार्यालय में फार्म नं0 QIR-12 जमा करने पर व्यय।
  4. प्रथम वर्ष की वार्षिक Compliance तथा आयकर विवरणिका क्रमशः फार्म AOC-4 फार्म MGT-7, फार्म

PAS-3], फार्म निदेशकों की KYC जमा करने पर सम्मिलित है।

  1. एफ0पी0ओ0 के पंजीयन तथा उससे सम्बन्धित प्रथम वर्ष की विधिक कार्यवाही पूर्ण करने हेतु लगभग रू0 36,500/- का न्यूनतम व्यय निहित है।
  2. द्वितीय वर्ष तथा आगे के वर्षो में रजिस्ट्रार आफ कम्पनीज के नियमों का अनुपालन (कम्प्लायेन्सेज), आयकर विवरणिका जमा तथा वार्षिक बैलेन्स शीट आडिट की व्यवस्था करना। फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी के गठन के पश्चात द्वितीय वर्ष तथा आगे के वर्षों में क्रमश फार्म AOC-4 फार्म, MGT-7 फार्म, PAS-3 रजिस्ट्रार आफ कम्पनीज की वेबसाइट पर ऑन-लाइन जमा करने के साथ-साथ समस्त निदेशकों की KYC तथा बैलेन्स शीट आडिट कराना अति आवश्यक होगा। यह कार्य चार्टड एकाउन्टेन्ट/कम्पनी सेकरेटरी के द्वारा पूर्ण किया जाता है। द्वितीय वर्ष तथा आगे के वर्षो में अनुमानतः लगभग रू0 11,500/- का न्यूनतम व्यय निहित है।
  3. एफ0पी0ओ0 को पंजीयन उ0प्र0 सहकारी पंजीयन अधिनियम के अन्तर्गत ही किये जाने के निर्देश दिये गये हैं।

इसके पंजीयन हेतु राज्य सरकार द्वारा मॉडल बाईलाज तथा न्यूनतम शुल्क निर्धारित है, जिसके बारे में सम्बन्धित विभागीय रजिस्ट्रार कार्यालय से सूचना प्राप्त की जा सकती है।

नोटः 

  1. डिजिटल सिग्नेचर की वैधता दो वर्ष की है। भविष्य में सिर्फ एक निदेशक के डिजिटल सिग्नेचर का नवीनीकरण कराना होगा। एक डिजिटल सिग्नेचर पर कुल रू. 1000/- का व्यय आता है।
  2. फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी के निदेशकों को यह परामर्श दिया जाना चाहिये कि वे अपना मोबाइल नम्बर तथा ई-मेल आईडी न बदलें। अन्यथा KYC कराने पर व्यय अतिरिक्त जानकारी होगा।

UPFPO राज्य स्तरीय परियोजना प्रबन्धन इकाई:

राज्य स्तरीय परियोजना प्रबन्धक इकाई द्वारा फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनियों के गठन तथा उसे सत्त रूप से क्रियाशील बनाये जाने हेतु लिये गये नीतिगत निर्णयों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा गठित फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनियों के क्रियाकलापों की समीक्षा, उनके समक्ष आने वाले कठिनाइयों के निस्तारण तथा शासन द्वारा संचालित विभिन्न विकास योजनाओं/परियोजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनियों को उपलब्ध कराने हेतु नीतिगत निर्णय/दिशा निर्देश दिए जायेंगे।

कृषि उत्पादन आयुक्त शाखा के विभागों क्रमशः ग्राम विकास विभाग, उ0प्र0 शासन, राज्य औषधि पादप बोर्ड, उ0प्र0, मत्स्य पालन विभाग, उ0प्र0 शासन, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उ0प्र0 शासन, कृषि विभाग, कृषि शिक्षा एवं कृषि शोध, उ0प्र0 शासन, पशुधन विभाग, उ0प्र0 शासन, दुग्ध विकास विभाग, उ0प्र0 शासन, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, उ0प्र0 शासन, जल संसाधन विभाग, उ0प्र0 शासन, समाज कल्याण विभाग, उ0प्र0 शासन, पंचायतीराज विभाग, उ0प्र0 शासन, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, उ0प्र0 शासन, रेशम विभाग, उ0प्र0 शासन, लघु सिंचाई एवं भूजल विभाग,उ0प्र0 शासन, परती भूमि विकास, उ0प्र0 शासन के अतिरिक्त शासन के साथ-साथ अन्य विभागों द्वारा भी अपनी विकास योजनाओं/परियोजनाओं में फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनियों के सत्त विकास के लिए सुविधा प्रदान करने हेतु निर्देशित किया जा चुका है।

इसके अलावा अन्य विकास विभागों द्वारा समय-समय पर ग्रामीणों एवं किसानों के सत्त विकास हेतु जारी होने वाली योजनाओं/परियोजनाओं के लाभार्थी समूह में फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनियों को भी अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया जायेगा।

फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनियों को रिवाल्विंग फण्ड की व्यवस्था सुनिश्चित करने में सहयोग करना:

उ0प्र0 कृषक उत्पादक संगठन नीति-2020 में स्वीकृत व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी,जिनकी सदस्य/शेयर होल्डर संख्या 500 से अधिक हो, तो 5.00 लाख तक का रिवाल्विंग फण्ड/कैश क्रेडिट लिमिट बैंक के माध्यम से विभागीय ब्याज दरों योजना के अन्तर्गत उपलब्ध कराया जायेगा। यह सुविधा सम्बन्धित फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी के सदस्य किसानों को संगठित रूप से कृषि इनपुट्स के क्रय तथा अन्य आवश्यक कृषि कार्य से सम्बन्धित आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु कार्यशील पूॅंजी हेतु उपलब्ध कराया जायेगा। किसी भी परियोजना में इस मद में प्राप्त धनराशि का उपयोग दीर्घकालिक जरूरतों की पूर्ति में अनुमन्य नहीं होगा।

पूर्ण रूप से क्रियाशील एवं सफल फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनियों (FPO) का भ्रमण:

राष्ट्रीय स्तर पर पूर्ण रूप से क्रियाशील एवं सफल फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनियों के भ्रमण कार्यक्रम का समन्वय भी राज्य स्तरीय परियोजना प्रबन्धन इकाई स्तर पर किया जायेगा। इस प्रयास से कम्पनी के निदेशक किसानों एवं कम्पनी के मुख्य अधिकारियों का लाभ होगा। उन्हें अपने परम्परागत कृषि एवं औद्यानिकी क्रियाकलापों से हटकर कुछ अतिरिक्त करने तथा सम्पूर्ण मूल्य श्रृंखला की स्थापना करने का अवसर प्राप्त होगा। अन्तर्जनपदीय भ्रमण कार्यक्रम वर्ष में दो बार अन्तर्राज्यीय भ्रमण कार्यक्रम वर्ष में एक बार आयोजित किया जायेगा। विशेष परिस्थितियों में सहभागिता आधार पर भ्रमण कार्यक्रमों की संख्या बढ़ायी जा सकती है। भ्रमण कार्यक्रमों का कैलेंण्डर प्रत्येक वर्ष के प्रारम्भ में ही राज्य स्तरीय परियोजना प्रबन्धन इकाई द्वारा जारी कर दिया जायेगा। वित्तीय वर्ष के प्रारम्भ में ही प्रत्येक जनपद से पूर्ण क्रियाशील फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनियों की सूची राज्य स्तरीय परियोजना प्रबन्धन इकाई द्वारा मंगा ली जायेगी। पूर्ण क्रियाशील का तात्पर्य है कि सम्बन्धित एफ0पी0ओ0 की आर0ओ0सी0 के साथ-साथ आयकर एवं अन्य विधिक औपचारिकताए पूर्ण हों तथा उनके व्यवसायिक कार्यक्रम एफ0पी0ओ0 की मूल अवधारणा के अनुसार संचालित हों।

अनुश्रवण एवं राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का आयोजन:

राज्य स्तरीय परियोजना प्रबन्धन इकाई स्तर पर कार्यक्रम की समवर्त्ती अनुश्रवण के साथ-साथ यथा आवश्यकता ‘‘तीसरे पक्ष की निगरानी में अनुश्रवण‘‘ की व्यवस्था के संचालन का समन्वय किया जायेगा। मानिटरिंग रिपोर्ट के आधार पर प्रत्येक वर्ष प्रदेश स्तर पर प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय पुरस्कार की घोषणा की जायेगी। यह पुरस्कार स्वामी विवेकानन्द की जयन्ती पर ससमारोह मा0 मुख्यमंत्री/मा0 कृषि मंत्री द्वारा प्रदान किया जायेगा। इसमें स्मृति चिन्ह, प्रमाण-पत्र तथा शाल भेंट कर सम्बन्धित निदेशक कृषक को सम्मानित किया जायेगा। इस प्रयास से फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनियों के मध्य उच्च स्तरीय प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण का सृजन होगा।

UPFPO  के डैश बोर्ड की स्थापना:

राज्य स्तरीय परियोजना प्रबन्धन इकाई के स्तर पर प्रदेश में गठित तथा पूर्ण क्रियाशील फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनियों का एक डैश बोर्ड स्थापित किया जायेगा। इसमें फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनियों से जुड़ी समस्त जानकारियों जैसे- निदेशकों एवं शेयर होल्डर्स का विवरण, आर0ओ0सी0 से जुड़ी अद्यतन रिपोर्ट, बैलेन्स शीट, बैंक खाते का विवरण तथा कम्पनी के व्यावसायिक क्रियाकलापों की रिपोर्ट दर्ज होगी। साथ ही इस पर एक लिंक भी उपलब्ध होगा जिस पर डैश बोर्ड में शामिल कोई भी एफ0पी0ओ0 अपने व्यवसाय से जुड़ी अद्यतन जानकारी आन-लाइन भेज सकेगा। एफ0पी0ओ0 द्वारा भेजी गयी जानकारी को राज्य स्तरीय परियोजना प्रबन्धन इकाई द्वारा इसे डैश बोर्ड में सम्बन्धित एफ0पी0ओ0 की विवरणिका में दर्ज कर देगा। इस जानकारी के आधार पर फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनियों के व्यावसायिक क्रियाकलापों को बैंकिग सुविधा उपलब्ध कराने में राज्य स्तरीय परियोजना प्रबन्धन इकाई को आसानी होगी। इस सम्बन्ध में यू0पी0 एफ0पी0ओ0 शक्ति पोर्टल मा0 मुख्यमंत्री जी, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के किसानों को समारोह समर्पित किया जा चुका है।

UPFPO  के जिला स्तरीय परियोजना प्रबन्धन इकाई:

जनपद स्तर पर कार्यक्रम के क्रियान्वयन हेतु नीतिगत निर्णय लिए जायेंगे। कार्यक्रम के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन हेतु सम्बन्धित जनपद के उप निदेशक कृषि के प्रत्यक्ष संरक्षण/नियंत्रण में एक जनपद स्तरीय एफ0पी0ओ0 क्रियान्वयन सेल का औपचारिक गठन किया जायेगा। इस सेल द्वारा विकास खण्ड स्तर पर एफ0पी0ओ0 के 77गठन हेतु किये जा रहे प्रयासों की संकलित जानकारी रखी जायेगी। इस सेल के प्रभारी द्वारा यथा आवश्यकता सम्बन्धित विवरण जनपद के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित उक्त समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के साथ-साथ जनपद के क्रेडिट-लिन्कड-पोटेन्शियल एग्रीक्लचर डवलपमेंट प्लान तैयार करने हेतु उपयोग में लाया जायेगा। इस प्रयास से जनपद में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का प्रदेश की अर्थव्यवस्था की पर्यावरण अनुकूल परिस्थितियों में प्रदेश में उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का अनुशासित उपयोग करते हुये सत्त विकास की परिकल्पना को मूर्त रूप प्रदान किया जाना आसान हो जायेगा। जनपद स्तर पर एफ0पी0ओ0 क्रियान्वयन सेल का मुख्यालय कृषि प्रौद्योगकीय प्रबन्धन एजेंसी (आत्मा) के जनपद स्तरीय कार्यालय में ही होगा। किस ब्लाक में किस प्रकार का एफ0पी0ओ0 यथा कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, रेशम इत्यादि से संबंधित एफ0पी0ओ0 का गठन किया जायेगा। इस संबंध में भी संबंधित विभागों के जनपद स्रतीय अधिकारियों को समय-समय पर निर्देश निर्गत किये जायेंगें। कार्यक्रम को बहुपयोगी एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से इस समिति में अध्यक्ष द्वारा आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सदस्यों को भी नामित किये जाने के निर्देश हैं।

UPFPO  के गठन हेतु राज्य स्तरीय पैनल का गठन:

राज्य स्तरीय परियोजना प्रबन्धन इकाई द्वारा प्रदेश स्तर पर एफ0पी0ओ0 गठन हेतु अनुभवी एवं विषय वस्तु विशेषज्ञ स्वैच्छिक संगठन का एक पैनल गठित किया जायेगा। इस पैनल में प्रदेश के विभिन्न जनपदों में गठित एवं क्रियाशील ऐसी फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनियों के प्रथम निदेशक सम्मिलित किये जायेंगे जिनके द्वारा कृषि उत्पाद मूल्य श्रृंखला संवर्धन हेतु कम से कम दो वर्षों से कार्य किया जा रहा हो तथा कम्पनी का वार्षिक टर्न-ओवर 50.00 लाख रूपये से अधिक हो। इस पैनल में सम्मिलित स्वैच्छिक विशेषज्ञों की अधिकतम संख्या 50 होगी। इन विशेषज्ञों द्वारा अपने क्षेत्र में किसानों को कृषि उत्पाद मूल्य संवर्धन तथा विभिन्न योजनाओं से सहायता प्राप्त करने हेतु प्रेरित किया जायेगा। साथ ही अपने निकटवर्ती विकासखण्ड के जागरूक किसानों को प्रशिक्षित कर फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी के गठन में भी सहयोग प्रदान किया जायेगा। इन विशेषज्ञों को राज्य स्तरीय परियोजना प्रबन्धन इकाई के बाद उनकी सेवाओं के लिए नियमानुसार मानदेय प्रदान करने की व्यवस्था की जायेगी, जो एफ0पी0ओ0 के सफलतापूर्वक गठन के उपरान्त देय होगा। पैनल में सम्मिलित स्वैच्छिक विशेषज्ञों को उनकी स्वैच्छिक सेवाओं हेतु राज्य स्तरीय परियोजना प्रबन्धन इकाई द्वारा पहचान पत्र भी प्रदान किया जायेगा। 

UPFPO  के प्रस्तावित लक्ष्य:

उ0प्र0 कृषक उत्पादक संगठन नीति-2020 के अन्तर्गत राज्य स्तरीय परियोजना प्रबन्धन इकाई द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-22 में प्रदेश के प्रत्येक विकास खण्ड में कम से कम एक फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी के गठन के निर्देश दिये गये हैं।

इस प्रकार गठित प्रत्येक फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी (एफ0पी0ओ0) में औसतन शेयर होल्डर किसानों की संख्या 300 अथवा इससे अधिक रखने का लक्ष्य निर्धारित है, जिससे भविष्य में सम्बन्धित विकास खण्ड में अन्य एफ0पी0ओ0 के गठन का मार्ग प्रशस्त हो सके। इसमें भारत सरकार की एफ0पी0ओ0 पॉलिसी के अन्तर्गत नाबार्ड, एन0सी0डी0सी0, एस0एफ0ए0सी0 द्वारा गठित की जाने वाली एफ0पी0ओ0 राज्य सरकार के प्रस्तावित लक्ष्य के अतिरिक्त हों।

UPFPO योजना के लिए Online Registration:

  • उत्तर प्रदेश में रहने वाले सभी कृषक ऑनलाइन आवेदन करना चाहते है तो वह नीचे दिए गए तरीके को फॉलो करे।
  • सबसे पहले आपको UPFPO की ऑफिसियल वेबसाइट पर जाना होगा। ऑफिसियल वेबसाइट पर जाने के बाद आपके सामने होम पेज खुल जायेगा।UPFPO REGISTRATION
  • इस होम पेज पर आपको साइन अप करें (Signup) का  का ऑप्शन दिखाई देगा आपको इस ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। ऑप्शन पर क्लिक करने के बाद आपके सामने Registration पेज खुल जायेगा।
  • इस पेज पर आपको एफ.पी.ओ. के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। आपको इस रजिस्ट्रेशन फॉर्म में पूछी गयी सभी जानकारी, जैसे- एजेंसी का नाम, जनपद का नाम, ब्लॉक,  FPO का नाम, पंजीकरण संख्या, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और बैंक खाता का विवरण आदि  को चयन करना होगा।
  • सभी जानकारी भरने के बाद ( यह देख ले की सभी जानकारी सही भरें है और अपना पासवर्ड सही भरें) आपको सबमिट के बटन पर क्लिक करना होगा। इस तरह आपका पंजीकरण पूरा हो जायेगा।

UPFPO पंजीकृत लॉगिन कैसे करे:

  • सर्वप्रथम आवेदक को ऑफिसियल वेबसाइट पर जाना होगा। ऑफिसियल वेबसाइट पर जाने के बाद आपके सामने होम पेज खुल जायेगा।

  • इस होम पेज पर आपको लोग इन करें  (Login) के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। इस ऑप्शन पर क्लिक करने के बाद आपके सामने Login पेज खुल जायेगा। UPFPO LOGIN

  • इस पेज पर आपको पंजीकृत उपयोगकर्ता लॉगिन दिखाई देगा आपको इस लॉगिन में उपयोगकर्ता अपना यूजरनाम और पासवर्ड और भरना होगा।

  • इसके बाद आपको i’m not a robot के बटन पर क्लिक करना होगा। 

  • इसके बाद आपको लॉगिन के बटन पर क्लिक करना होगा। इस तरह आपका लॉगिन हो जायेगा।

UPFPO योजना की Office जानकारी के लिए पता, Email id और Contact Number:

FAQ (Frequently Asked Questions):

Uttar Pradesh Farmer Producer Organizations (UPFPO) योजना क्या है?

उत्तर प्रदेश सरकार के रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनी द्वारा नियंत्रित होती हैं। इस कम्पनी अधिनियम के अर्न्तगत सरकार द्वारा अपने किसानों को भी अपनी स्वयं की कम्पनी बनाकर व्यवसाय करने का अवसर प्रदान किया गया है। अगर सीधे शब्दों में कहे तो अब किसान हमारा उत्पादक ही नहीं अपितु वह किसान तथा बनिया के रूप में काम कर सकता है।

UPFPO क्या है?

उत्तर प्रदेश सरकार के रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनी द्वारा नियंत्रित होती हैं। इस कम्पनी अधिनियम के अर्न्तगत सरकार द्वारा अपने किसानों को भी अपनी स्वयं की कम्पनी बनाकर व्यवसाय करने का अवसर प्रदान किया गया है। अगर सीधे शब्दों में कहे तो अब किसान हमारा उत्पादक ही नहीं अपितु वह किसान तथा बनिया के रूप में काम कर सकता है।

UPFPO शक्ति योजना किसके लिए हैं?

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एफपीओ के लिए लघु एवं सीमांत किसान तथा भूमिहीन किसान को इसके लिए लाभार्थी होंगे।

Uttar Pradesh Farmer Producer Organizations (UPFPO) योजना का लाभ किसे मिलेगा ?

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एफपीओ के लिए लघु एवं सीमांत किसान तथा भूमिहीन किसान को इसके लिए लाभार्थी होंगे।

UPFPO Shakti योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

इस योजना का आवेदन के लिए Official Portal, http://www.upfposhakti.com/, वेबसाइट पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

UPFPO योजना का लाभ कैसे मिलेगा?

इस योजना का आवेदन के लिए Official Portal, http://www.upfposhakti.com/, वेबसाइट पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

UPFPO योजना कब शुरू की गई थी?

2021-2022

UPFPO योजना पात्रता क्या हैं?

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा UPFPO के लिए लघु एवं सीमांत किसान तथा भूमिहीन किसान को इसके लिए पात्र माने जायेंगे।

Uttar Pradesh Farmer Producer Organizations योजना रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन कैसे करे?

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा UPFPO को Official Portal http://www.upfposhakti.com/, वेबसाइट में जाकर आवेदन करना होगा।

UPFPO FULL FORM क्या हैं?

Uttar Pradesh Farmer Producer Organizations.

UPFPO योजना की जानकारी के लिए पता, Email id और Contact Number क्या हैं?

Krishi Bhawan, M M Marg, Lucknow, Uttar Pradesh, INDIA Email id- upagriculture@gmail.com

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